Thursday, 7 March 2013

Bhavna

Posted by Stop Acid Attacks On Thursday, March 07, 2013
एसिड अटैक की शिकार भावना 

जिंदगीनामा 



मेरठ की रहने वाली भावना पर सात साल पहले एसिड फ़ेंक दिया गया था. जिसमे वो बुरी तरह झुलस गई थी. मेरठ से पत्रकार मानसी मिश्रा ने STOP ACID ATTACKS को भावना के बारे में ये लेख भेजा है.

सात साल बाद भावना के चहरे पर मुस्कराहट फिर लौटी है। दो माह पहले वो भी दुल्हन बनी। उसके अधजले सपनों का प्यारा राजकुमार उसकी ज़िन्दगी में बहार लेकर आया। एक सिरफिरे ने तेजाब से भावना के जिस्म के साथ-साथ उसके सपनो को भी झुलसा दिया था। कानून ने अपराधी को सात साल की सजा दी और कुदरत ने पांच साल में ही मौत। समाज ने उसे प्यार दिया, किस्मत ने हमसफ़र, बस कुछ नहीं दिया तो सियासतदानों ने।

बरसों बरस वह आईनों से डरती रही। फूल सी नाज़ुक और खूबसूरत दिखने वाली चौदह बरस की भावना इश्क- जूनून और तमाम संबंधो के सही मतलब भी नहीं जान पाई थी। न जाने किस घडी में वह सत्तर साल के सिरफिरे शाबिर की नजरों में चढ़ गयी थी। पूरे दो साल वो भावना का पीछा करता रहा। अकेले में वो भावना को शादी का प्रस्ताव देने लगा। विरोध करने पर किसी भी हद से गुजर जाने की धमकी देने लगा। दसवीं क्लास में पहुच चुकी भावना में भीतर तक डर बैठ चूका था। सहेलियों के साथ खेलना, बाज़ार जाना, पड़ोस वाली आंटी के घर से लेकर स्कूल जाना तक सब बंद कर दिया। जहां भी जाती बड़ी बहन प्रतिमा साथ जाती। नतीजा भावना दसवीं में फेल हो गई। ज़िन्दगी में सोलहवां साल भी आ गया। भावना की ज़िन्दगी में ये सोलहवां साल भी दूसरी लड़कियों की तरह मन में उमंगें और सपने लेकर नहीं बल्कि दहशत लेकर आया था। घर में अकेली रहने वाली अब पढाई छोड़ दी तो घर से निकलना पूरी तरह बंद हो गया। कितने ही दिन वो कमरे में पड़ी सिसकती रही। घर में मत-पिता के आलावा कोई भाई भी नहीं था जिससे भावना अपना दर्द कहती। एक दिन प्रतिमा ससुराल से लौटी तो भावना उससे लिपटकर फुट-फूटकर रो पड़ी। बहन ने साथ में बाज़ार चलने को कहा। बहन को भी कहाँ पता था कि पास की दूकान में हाथ में चाय के गिलास थामे बैठा शाबिर गिलास में चाय नहीं बल्कि अपना वहशी इरादा लेकर बैठा है। हिम्मत करके दोनों बहने जैसे ही शबीर के बगल से गुजरीं, एक हाथ वाले शबीर ने भावना पर चाय का गिलास उड़ेल दिया। बगल में चल रही प्रतिमा पर भी कुछ छींटे पडीं। भावना ने जैसे ही चहरे पर हाथ फेरा। पलकों सहित उसकी खाल हाथों में आ गयी। वोह बहुत तेज चीख पड़ी। इतनी तेज कि उसकी आवाज़ आज तक नहीं लौटी। उधर शाबिर भाग चूका था। लोगों ने भावना को अस्पताल पहुँचाया और शाबिर को जेल। तमाम चैनल और अख़बारों में भावना सुर्खियाँ बटोर रही थी और इधर उसकी ज़िन्दगी बिखर गई थी। अस्पताल से लौटी तो पता चला कि इस घटना ने सर से पिता का साया भी छीन लिया था। उसके पिता सदमा नहीं झेल सके और उनकी मौत हो गई। अब तो घर के हालात ही बिगड़ गए। भावना बताती हैं कि उस दौरान सरकार और प्रशाशन ने कई वादे किये मगर नतीजा वही पारंपरिक. अब मैं डर भुला तमाम मंचो से आवाज़ उठती रही, फिर भी कुछ नहीं हुआ। समाज ने मेरा बहुत साथ दिया।शादी की बात आई तो सभी फिर साथ हो गए। किसी ने बर्तन तो किसी ने कपडे तो किसी ने पैसे, जेवर देकर भावना की शादी की। आज भी जब कोई कुछ दिलाने के नाम पर उनसे सम्पर्क करता है तो वो खीझक्र कहती हैं, कि रहने दीजिये अब भरोसा टूट चूका है।

Name: Bhawana
Bank: Punjab National Bank
Branch: Meerut
Account No: 2534000109273312
MICR Code: 250024007
IFSC Code: PUNBO253400



Chhanv

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