Monday, 4 March 2013

Sneha

Posted by Stop Acid Attacks On Monday, March 04, 2013 No comments

लेकिन स्नेहा का चेहरा काफी जल चुका था. उसका चेहरा अब वैसा नहीं था, जैसा हुआ करता था. दहेज के लिए प्रताडित होने के बाद उसे जो जिंदगी मिली थी वो बहुत ही भयावह थी.

बड़े अरमानो के साथ शादी के बाद ससुराल के लिए विदा हुयी स्नेहा को दजेह के लालची परिवार ने दहेज के लिए एसिड से जला दिया.

शादी के बाद से स्नेहा के परिवार वाले उसे दहेज के लिए परेशान करने लगे. स्नेहा का पति और उसका भाई उसे परेशान करते थे. 1997 , में दहेज का लालच इतना बढ़ गया कि उन्होंने स्नेह को एसिड से जला ही दिया. 
वो स्नेहा को अस्पताल ले गया लेकिन पुलिस केस होने के डर से स्नेहा के घरवालों को बुला लिया और एफआईआर न करने के लिए मनाने लगा. जिस पर स्नेह का परिवार मान गया.

लेकिन स्नेहा का चेहरा काफी जल चुका था. उसका चेहरा अब वैसा नहीं था, जैसा हुआ करता था. दहेज के लिए प्रताडित होने के बाद उसे जो जिंदगी मिली थी वो बहुत ही भयावह थी.

लेकिन जब स्नेहा अस्पताल से घर लौटी तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा. उसके पति ने उसे अकेला छोड़ दिया. उसे अपने बच्चों से मिलने के लिए मना कर दिया गया था. घर में उससे कोई बात नहीं करता था. उसको किचन, बेडरूम और लिविंग रूम में भी जाने के लिए मना कर दिया, गया. जब घर के दरवाजे की घंटी बजती थी तो उसे कहीं और जाने के लिए कहा जाता था.

कुछ दिनों बाद स्नेहा के बच्चे को कहीं और ले गए. जिस पर स्नेहा ने पुलिस की मदद मांगी पर पुलिस ने उसकी बात को बेतुका बता दिया. इस दौरान उसके परिवार ने भी उसका साथ देना छोड़ दिया. जिसके करीब डेढ़ महीने बाद उसके पति ने तलाक की अर्जी डाल दी. जिसे मंजूरी मिल गयी थी. उसके बाद से उसने अपने बच्चे को नहीं देखा.

इसके बाद बजाय भाग्य पर रोने के स्नेहा ने इसे पढ़ना शुरू किया. उसने एस्ट्रोलोजी की पढ़ाई शुरू कर दी. पहले तो करीब 150 एस्ट्रोलोजर के पास गयी. बाद में बाकायदा एक टीचर से इसकी पढ़ाई करने लगी.
धीरे-धीरे स्नेहा  एस्ट्रोलोजर बन गयी. आस-पास की जगहों पर वो एक फेमस एस्ट्रोलोजर बन चुकी थी. इसके साथ ही स्नेह ने टेरो कार्ड रीडिंग, अंकज्योतिषी, वास्तुशास्त्र भी पढ़ना शुरू किया.

इसके साथ स्नेहा मराठी फिल्मो और टीवी कार्यक्रमों के लिए डाईलोग भी लिखने लगी और काफी सफल हुयी. इन सबकी वजह से स्नेहा लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई. 

स्नेहा आज अपनी हिम्मत और मेहनत के बल पर आज एक कामयाबी के मुकाम पर पहुँच चुकी है. वो एसिड अटैक पीड़ितों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत की तरह बन गयी है.

बीस दर्दनाक सर्जरी के बाद उसे और सर्जरी करवाने की सलाह दी गई है लेकिन स्नेहा अब इसी तरह से जीना चाहती हैं. वो कहती हैं की अब यही मेरा चेहरा है, अगर किसी को मुझे देखने में परेशानी हो रही है तो वो मुझे न देखे.

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