Saturday, 20 April 2013

We urgently need a social reform policy: Alok

Posted by Stop Acid Attacks On Saturday, April 20, 2013 No comments
"रेप के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रही एक लड़की को पुलिस अधिकारी द्वारा थप्पड़ों से मारा जाना, पुलिस का परिवार को दो हजार रूपये रिश्वत की पेशकश कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश करना, यह सब क्या दर्शाता है? एक मानसिकता जो कि अभी भी तानाशाही चलाने में लगी हुई है। एक व्यवस्था जो इस कदर लचर है कि उसका सारा बोझ अब भरभरा कर बैठ रहा है।"

Alok Dixit
alok@stopacidattacks.org

मैं पिछले दो दिनों से दिल्ली में पांच साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार के खिलाफ प्रोटेस्ट में शामिल हो रहा हूं। जाने क्यूं लेकिन वही सारे जाने पहचाने चेहरे प्रोटेस्ट करने के लिये वहां मौजूद दिखते हैं। पांच साल की एक मासूम बच्ची का इस तरह से रेप किया गया कि उसके पेट से मोमबत्तियां निकाली गईं, पर प्रोटेस्ट करने वाले वही चंद चेहरे। आखिर हम किस मानसिकता के साथ घरों में बैठे हैं? किस दिन का इंतजार कर रहे हैं कि एक जादू होगा और रेप खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगे या फिर रेप को रोकने के लिये कोई नया कानून आ जाएगा और फिर हमें अखबारों में बलात्कार की खबरें के लिये कोई नया कोना तलाशना होगा? रेप के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रही एक लड़की को पुलिस अधिकारी द्वारा थप्पड़ों से मारा जाना, पुलिस का परिवार को दो हजार रूपये रिश्वत की पेशकश कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश करना, यह सब क्या दर्शाता है? एक मानसिकता जो कि अभी भी तानाशाही चलाने में लगी हुई है। एक व्यवस्था जो इस कदर लचर है कि उसका सारा बोझ अब भरभरा कर बैठ रहा है। एक सामाजिक खोखलापन जिसमें पड़ोस में अपराध हो रहा है पर उसे जानने के लिये किसी के पास वक्त नहीं है। हम सोए हुए हैं, या कहें कि इस तेजी से भाग रहे हैं कि पूरी आंखें बंद कर ली है। आखिर क्या सोचकर बैठे हैं हम घरों में?


क्या हमें अब एक सोशल रिफार्म की पालिसी नहीं लानी चाहिये। अगर एक पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार होता है तो यह तो नहीं कहा जा सकता है कि उसमें कपड़े ठीक से नहीं पहने थे या उसका चाल चरित्र ठीक नहीं था। कानून पहले से ही मौजूद हैं हमारे पास, हिंसक हम हो नहीं सकते हैं। बताइये क्या मांग करें हम? जवाब नहीं सूझता? तो घर में बैठकर आप क्या साबित करने वाले हैं? टीवी देखकर सिस्सटम को गरिया नहीं रहे हैं आप? आपको भी पता है कि सिस्टम कुछ नहीं कर सकता। हैवानियत समाज में है तो सिस्टम में भी झलकेगी ही। बलात्कारी सरकार नहीं बल्कि समाज है। सरकारें तो समाज की ही देन हैं। मैं पूछता हूं इरादा क्या है आपका? इस खबर को पढ़कर अखबार के दूसरे पन्नों की तरफ मुह घुमा लेंगे या फिर फेसबुक पर फोटो टैग और शेरो शायरी पढ़ने के लिये होम पेज पर क्लिक कर लेंगे? आप स्पष्ट करें जरा।

Join me and tell the Home Minister of India, Sushil Kumar Shinde and the Delhi Police Commissioner Niraj Kumar to immediately dismiss all the policemen who denied to file the complaint, tried to bribe the victim’s father, and watched as the ACP slapped the peaceful protester.

We need as many signatures as we can before we deliver the petition to Home Minister Shinde. Click



(Alok Dixit is a journalist turned social activist, fighting for the freedom of internet in India. He is the founder member of 'Save Your Voice’, a movement against internet censorship in India and 'Stop Acid Attacks' Campaign. His works includes campaigning against the censorship on the online media and to help acid survivors to live a life free of violence. With his demand of free and open internet, Alok is creating a nationwide awareness among the youth through his writings and peaceful protests. He is advocating for the protection of freedom of expression and human rights by engaging communities and supporting people’s voices around the world. He is also working hand in hand with government, donors, media, NGOs, celebrities and students to help acid survivors rebuild their lives and to prevent further attack.)


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    We work with partners and stakeholders towards elimination of acid and other forms of burn violence and protection of survivors' rights. The process of justice to an acid attack victim remains incomplete until she gets immediate medical, legal and economic help, along with the critical social acceptance. Our vision is to free India from this crime, which reflects the flaws of our patriarchal society and abusive attitudes. We want survivors to have access to fast justice and fight back the irreparable impact of this crime.

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