Saturday, 1 June 2013

 वह बार बार कहती थी कि उसे जीना है, सब कुछ ठीक करना है। लेकिन आज वह इस दुनिया में नहीं है। उसे कोई इंसाफ नहीं मिला। उसका परिवार मुंबई से एक हताशा लेकर लौटेगा और साथ ही तेजाब हमलों का यह सिलसिला ऐसे ही बेदस्तूर जारी रहेगा। हम कब प्रीती और परिवार को इंसाफ दिला पाएंगे? 

File Photo: Preeti Rathi's parents
Alok Dixit
alok@stopacidattacks.org

आज सारा दिन एसिड फाइटर प्रीती राठी के पापा के साथ रहा। उनके जब्बे को देखकर लगा कि लोग इस दौर में भी समाज और देश के लिये अपने व्यक्तिगत हितों को दांव पर रखने से नहीं चूकते हैं। एक ओर प्रीती का मृत शरीर अस्पताल में रखा हुआ है, मां बार बार बेहोश हो रही है और वहीं दूसरी ओर एक पिता इस मांग के साथ उस पार्थिव शरीर को लेने से मना कर रहा है कि अगर एसिड की खुली बिक्री पर रोक नहीं लगी और सरकार ने तेजाब हमलों को रोकने के लिये कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया तो वो उस प्रीती के शरीर (डेड बाडी) को लेंगे ही नहीं। मैंने देखा कि कैसे परिवार के तमाम सदस्यों से विरोध करके भी पिता अमर सिंह हमारे साथ आन्दोलन में कूद गए। 


उनके हौसले को बनाए रखने के लिये यह जरूरी है कि हम रविवार 2 जून को बांबे हास्पिटल के बाहर ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुचकर सरकार पर दबाव बनाने की एक कोशिश करें ताकि आगे से किसी मासूम को इस तरह व्यवस्था का शिकार न बनना पड़े। प्रीती जब मुम्बई आई थी तो उसकी आखों में नर्स बनने का एक सपना था पर जब उस पर हमला हुआ और कई दिन बीत जाने के बाद भी हमलावर को पकड़ा नहीं जा सका, तब प्रीति ने बड़ी मुश्किलों में लिखकर यह मांग की कि उसके हमलावर को जरूर पकड़ा जाए और सेना की जिस नौकरी को वह क्वालीफाई कर ज्वाइन करने आई थी, उसे दी जाए। प्रीती ने और तेजाब हमले न हों इसके लिये भी सरकार से कानून बनाने की मांग की थी। वह बार बार कहती थी कि उसे जीना है, सब कुछ ठीक करना है। लेकिन आज वह इस दुनिया में नहीं है। उसे कोई इंसाफ नहीं मिला। उसका परिवार मुंबई से एक हताशा लेकर लौटेगा और साथ ही तेजाब हमलों का यह सिलसिला ऐसे ही बेदस्तूर जारी रहेगा। हम कब प्रीती और परिवार को इंसाफ दिला पाएंगे। जिस अस्पताल में प्रीती ने दम तोड़ा उसी अस्पताल में एक और लड़की बिना किसी विशेष सहयोग के तेजाब की जलन झेलने को मजबूर है। कल ही दिल्ली में एसिड अटैक की एक और घटना हुई है। हालाकि कोई सरकारी आँकड़ा न होने से हम यह सही तरह से नहीं बता सकते कि आखिरकार देश में महिलाओं पर ऐसे कितने तालिबानी हमले हो रहे हैं पर टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 3 महीनों में लगभग 56 मामले मीडिया में रिपोर्ट हुए। हालाकि वास्तविक आकड़ा कहीं ज्यादा चौकाने वाला हो सकता है। 

रविवार को देश भर से एसिड फाइटर्स प्रीती के परिवार से मिलने पहुच रहे हैं और हम प्रीती के पिता की अगवाई में महाराष्र्प के गृह-मंत्री आरआर पाटिल से उनके घर जाकर व्यक्तिगत तौर पर यह निवेदन करेंगे कि महाराष्ट्र में तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगाने के लिये वे कड़े कानून लेकर आएं। हम परिवार को यह भी समझाएंगे कि वे अपनी जिद छोड़ प्रीती के अंतिमसंस्कार की तैयारी करें। प्रीती के परिवार को सुरक्षित दिल्ली पहुचाना और उनकी लड़ाई तो आगे तक लड़ने की जिम्मेदारी अब स्टाप ऐसिड अटैक्स कैंपेन और उसके ऐसिड अटैक फाइटर्स की है। तेजाब हमले विशेष तौर पर महिलाओं को निशाना बना कर ही किये जा रहे हैं इसलिये अब जरूरी है कि महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे तेजाब की खुलेआम बिक्री देश के सभी इलाकों में रोका जाए। हमें इन अपराघों के खिलाफ आवाज उठानी ही होगी।

(Alok Dixit is a journalist turned social activist, fighting for the freedom of internet in India. He is the founder member of 'Save Your Voice’, a movement against internet censorship in India and 'Stop Acid Attacks' Campaign.)




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