Sunday, 21 July 2013

*'The campaign is within you!'

Posted by Stop Acid Attacks On Sunday, July 21, 2013 No comments
एक अनूठी पहल 

इक्कीसवीं सदी में अपनी विशेष महत्ता प्रदर्शित कर रही महिला जाति में अभी भी कई सारी महिलायें अत्याचारों के घने साये में डर डरकर अपना जीवन व्यतीत कर रहीं हैं। एसिड अटैक्स कैम्पेन तेजाब से शिकार हुयी महिला पीडि़तों की मदद हेतु हर संभव कोशिश करने का प्रयास करता है। श्रीजी पारेख जैसी लड़कियां एक विद्यार्थी होते हुये भी एसिड अटैक्स से शिकार हुयी पीडि़तों के लिये अपनी पाॅकेट मनी से हर महीने एक हजार रुपये देकर लोगों के समक्ष एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। पारेख जी ने पैसे देने का सिलसिला इसी वर्ष के अप्रैल से प्रारंभ किया है। पारेख जी मुंबई से सीएस की पढाई एवं आई0 एन0 जी0 में इंटर्नशिप कर रही हैं। इस अभियान में कुछ सदस्य धन से तो कुछ अपना शारीरिक सहयोग देकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । अभी तक इस कैम्पेन में देश भर से सौ से अधिक लोग जुड़कर अपने कार्य को एक उचित मुकाम तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। 

मध्यप्रदेश के सागर में रहने वाली बाइस वर्षीय स्मृति की बात करें या बिहार की राजधानी पटना में रहने वाली पन्द्रह वर्षीय मासूम तुबा की, सिर्फ इतनी ही नहीं तेजाब कांड से जूझती मासूमियत की कतारें काफी लंबी हैं लेकिन इनकी मदद की खातिर उठ रहे कदमों की कतारें नाम मात्र ही दिखाई दे रहे हैं। आप सबने भी इस बात को अक्सर सुना भी होगा कि एक एक बूंद के सहयोग से एक गागर अर्थात घड़ा भी अपने मुहाने तक भर ही आता है। बस जरुरत है आप सबसे आपके सहयोग की जिससे बिलखती और दर्द से कराहती जिंदगियों का कुछ हद तक ही हम सहयोग कर पायें। सहयोग में पारदर्शिता रखते हुये हमने सीधे तौर पर पीडि़तों के एकाउन्ट नंबर आपको उपलब्ध कराये हैं। इसके लिये आप स्टाॅप एसिड अटैक्स की साइट पर जाकर उनके एकाउंट नंबर लेकर आर्थिक रुप से उनकी सहायता कर सकते हैं। आपके योगदान के लिये पीडि़तों के साथ हम भी आपके बहुत बहुत आभारी रहेंगे।

मैं अपना अनुभव व्यक्त कर रहा हूं कि- 'मासूमियत को महरुमियत में तब्दील करने वाले अक्सर मिल जाया करते हैं, कभी महरुम चेहरों में खुशी भर के देखो अपना और अपनों का दिल खुद बा खुद खुशी से झूम जायेगा।'







हिमांशु तिवारी मीडिया स्टूडेंट है और समय टुडे मैगजीन में कार्यरत हैं |सोशल मीडिया के माध्यम से समयसामायिक विषयों पर लिखते रहते हैं |

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Chhanv

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    SAA is a campaign against acid violence. We work as a bridge between survivors and the society, as most of the victims of this brutal crime, which is much more grave in its impact than a rape, have isolated themselves after losing their face. Due to ignorance of the government and civil society, most survivors find no hope and stay like an outcast, in solitude. SAA aims to research and track acid attack cases and compile a data to get the actual situation of survivors.

    Our Mission

    We work with partners and stakeholders towards elimination of acid and other forms of burn violence and protection of survivors' rights. The process of justice to an acid attack victim remains incomplete until she gets immediate medical, legal and economic help, along with the critical social acceptance. Our vision is to free India from this crime, which reflects the flaws of our patriarchal society and abusive attitudes. We want survivors to have access to fast justice and fight back the irreparable impact of this crime.

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